Karun Ras Kise Kahate Hain – करुण रस की परिभाषा,भेद और उदाहरण

Hindi Grammar

Karun Ras In Hindi – करुण रस किसे कहते हैं, यह कितने प्रकार के होते हैं उदाहरण सहित इस पोस्ट Karun Ras In Hindi पर आसान भाषा में बताया गया है। 

जिस किसी छात्र ने प्रतियोगी परीक्षाएं दी है उन्हें पता होगा कि रस विषय से जुड़े हुए हिंदी व्याकरण में कई सारे सवाल आते रहते हैं इसके लिए छात्रों को Karun Ras के बारे में ज्ञान होना चाहिए। यहां आप Karun Ras के बारे में सारी जानकारी पढ़ सकते हैं। 

Definition Of Karun Ras In Hindi – करुण रस परिभाषा

Karun Ras का स्थाई भाव शोक होता है Karun Ras वहां प्रयुक्त होता है जब किसी व्यक्ति की मनचाही वस्तु या कोई व्यक्ति जिसे वह दिल से चाहता है उससे अधिक मोह होता है और वह उससे दूर चली जाए तो इसमें व्यक्ति के मन में शोक भाव उत्पन्न होता है जिसे Karun Ras कहते हैं। 

उदाहरण के लिए कोई ऐसी नारी जिससे आप प्यार करते हैं और वह आपसे दूर हो जाए तो आपके मन में दुख पीड़ा और शोक, भाव उत्पन्न होते हैं और यह शोक भाव नष्ट, खत्म होने वाले दुख प्रकट करती है जो की करुण रस होते हैं। 

करुण रस के अवयव

स्थायी भाव: शोक।

आलंबन (विभाव): इसमें व्यक्ति के शोक का ह्रास होता है 

उद्दीपन (विभाव): व्यक्ति की अनुपस्थिति का दुख

अनुभाव:  रोना, पीटना, दुख, पीड़ा

संचारी भाव: क्रोध और संवेदनशीलता

Examples Of Karun Ras In Hindi – करुण रस के उदाहरण

1. राघौ गीध गोद करि लीन्हों। 

 नयन सरोज सनेह सलिल

सुचि मनहुँ अरघ जल दीन्हों। । 

2. मणि खोये भुजंग-सी जननी, 

फन-सा पटक रही थी शीश, 

अन्धी आज बनाकर मुझको, 

क्या न्याय किया तुमने जगदीश 

3. सीता गई तुम भी चले मै भी न जिऊंगा यहाँ

सुग्रीव बोले साथ में सब (जायेंगे) जाएँगे वानर वहाँ। 

Conclusion :  Karun Ras की सरल परिभाषा, भेद, अव्यव्य, उदाहरण सहित Karun Ras In Hindi पोस्ट पर बताए गए हैं जो करुण रस के बारे में पढ़ना चाहते हैं वह यहां से पढ़ सकते हैं। 

FAQs About Karun Ras In Hindi

Q1. करुण रस किसे कहते हैं ? 

Ans : करुण रस में जब कोई व्यक्ति अपनी मनचाही वस्तु से दूर हो जाए उसके अंदर दुख भाव उत्पन्न हो उसे करुण रस कहते हैं। 

Q2. करुण रस का स्थाई भाव क्या होता है

Ans : करुण रस का स्थाई भाव शोक होता है। 

Q3. करुण रस की अनुभूति कब होती है ?

Ans : करुण रस का स्थाई भाव शोक है इस अनुभाव में छाती पीटना, रोना, प्रेमपात्र के दूर होने की अनुपस्थिति का भाव होता है। 

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