Bhayanak Ras Kise Kahate Hain – भयानक रस की परिभाषा, भेद और उदाहरण

Hindi Grammar

Bhayanak Ras In Hindi – भयानक रस विषय को लेकर यहां पर सभी बातें सरल भाषा में समझाई गई है Bhayanak Ras का उपयोग कई सारे विश्वगाथाओं और लंका कांड में किया गया है, “Bhayanak Ras In Hindi” पोस्ट पर Bhayanak Ras Ki Paribhasha, Bhayanak Ras Ke Bhed और उदाहरण शेयर किए गए हैं, जो हर एक छात्रों के लिए उपयोगी है .

Definition Of Bhayanak Ras In Hindi – भयानक रस परिभाषा

ऐसी स्थिति में जब कोई भयानक वस्तु या कोई भयानक काव्य वर्णन सुनने या देखने को मिलता है तो उससे मन में Bhayanak Ras भाव उत्पन्न होते है वह Bhayanak Ras कहलाता है। 

सरल भाषा में बताया जाए तो वह सभी बातें जिससे मन में भय उत्पन्न हो या मन में व्याकुलता के भाव की अनुभूति होती है वह भयानक रस होते हैं। तुलसीदास ने Bhayanak Ras को बहुत ही सुंदर तरीके से पेश किया है। 

भयानक रस के अवयव 

  • स्थायी भाव – भय
  • आलम्बन विभाव – शून्य स्थान, बाघ, चोर, सर्फ
  • उद्दीपन विभाव – भयानक और आश्चर्य वाले भाव 
  • अनुभाव – काँपना, मुँह में सूखा, पसीना आना 
  • संचारी भाव – सम्मोह, त्रास, चिन्ता

Types Of Bhayanak Ras In Hindi – भयानक रस के भेद हैं 

  • स्वनिष्ठ भयानक रस 
  • परनिष्ठ भयानक रस

Examples Of Bhayanak Ras In Hindi – भयानक रस के उदाहरण

1. मिलेश न मानत जलधि जड़, गये चार दिन बीति ।

बोले रमेश सकोप तब, भय बिनु होहि न प्रीति ।।

2. आज बचपन का कोमल गात

जरा का नीला पात 

तीन दिन सुखद चाँदनी रात

और फिर अन्धकार, अज्ञात 

3. बाप ने मुझसे कहा था

दक्षिण दिशा की और पाँव करके मत सोना

वह मृत्यु की दिशा होती है

और यमराज को क्रुद्ध करना

बुद्धिमानी वाली बात नहीं होती 

Conclusion : मानव के सामने कुछ ऐसी वस्तु है या विषय देखने को मिलते हैं जिससे मन में भय वाले भाव की अनुभूति होती है वह सभी भयानक रस के अंतर्गत आते हैं Bhayanak Ras की परिभाषा, अवयव और भेद यहाँ बताए गए हैं। 

FAQs About Bhayanak Ras In Hindi

Q1. भयानक रस का क्या मतलब होता है ?

Ans : भय वाले विषय देखने या पढ़ने से जो मन में व्याकुलता उत्पन्न होती है वह भयानक रस कहलाते हैं। 

Q2. भयानक रस का स्थाई भाव क्या होता है ?

Ans : भयानक रस का स्थाई भाव भय होता है। 

Q3. भयानक रस के संचारी भाव क्या है ?

Ans : त्रास, ग्लानि, दैन्य, शंका, चिंता, आवेग

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